St. Jude the Apostle

सन्त युध्दा बारह शिष्यों मे से एक और पाकूष का भाई था। सन्त मत्तो, अध्याय (13.15) मे सन्त युध्दा के बारे मे बताते है, और कहते है कि वह येसु के चचेरा भाई था। क्योंकि यहूदी भाषा मे भाई वा बत्धु का मतलब खून बाटॉ हुआ भाई होता है। लेकिन किसी दूसरे जगह मे सन्त युध्दा की माता मरियम को येसु की माता का चचेरा बहन बताया गया है।

सन्त लुकस अपने सुसमाचार (7.17) मे युध्दा को बारह शिष्यों की सूची मे दिखाते है, और सन्त योहन ने (14.22) मे सन्त युध्दा के बारे मे चर्च करते है । सन्त मत्तो (10.3) सन्त मारकुस (3.18) सन्त युध्दा को युध्दा नहीं बल्कि तद्दै नाम से पुकारते है । लेकिन कैथोलिक थर्मग्रंथ के विव्दन कहते है कि युध्दा और तद्दै एक ही व्यक्ति है । इसलिए कलिसीया में उसे युध्दा के नाम से पुकारते है ।

यह कहना कठिन है कि कैसे युध्दा को आसहाय लोगों को संरक्षक माना जाने लगा। सन्त युध्दा और युदस (जिसने येसु के साथ विश्वासघात किया) के नामों मे कुछ समानता के कारण सन्त युध्दा को कई सालों तक अधिक लोकप्रियता न मिलसकी। लेकिन पिछले कुछ सालों से उनकी प्रसिध्दी काफी बढ गयी है। सन्त युध्दा संस्कृतिके अनुसार येसु का तस्वीर अपने हाथ मे लिये टिखाया गया है । यह तरीका एक बहुत प्रसिध्द कहानी से आया है । जिसमे येडेसा का राजा अबागर, येसु से अपने कोढ की बीमारी से मुक्ति के लिए आग्रह किया और राजा एक चित्रकार को चेसु का तस्वीर लाने के लिए भेजा। राजा अबागर का विश्वास देखकर, येसु ने अपने चेहरे को एक कपडे मे छापकर सन्त युध्दा को दिया और उसे राजा को दे देने के लिए कहा। येसु का तस्वीर देखकर राजा रोगमुक्त हो गया और बहुत सारे लेगों के साथ ख्रीस्तीर किया। बहुत बार सन्त युध्दा के सिर के बगल में आग की ज्वाला भी टिखाया जाता है । यह दर्शाता है कि पेन्टकोस्त के दिन सन्त युध्दा भी भव्य शिष्यों के सथ पवीत्र आत्मा पाते वक्त उपस्थित थे।

येसु के मरने के बाद सन्त युध्दा सिमोन के साथ मिसुपुतामिया, लीबिया और ख्रीस्तीर बनाया। सन्त युध्दा करिसिया या सिरया देशो मे शहीद हुएँ। अक्सर सन्त युध्दा के हाथ मे कुल्हाडी दिखाई जाती है वह इस बात का संकेत है कि उन्होने, सच्चाई एवं येसु पर अपने विश्वास के लिए अपने प्राणों की आहुती दी। उसकी मृत्थु के बाद उसके शरीर को रोम लाया गया और सन्त पीटर के महागिरजाघर मे रखा गया है।

मध्य कालीन युग मे कलेवोज (फ्रास) के सन्त बेर्नाड और स्वेदन के सन्त ब्रीजिट सन्त युध्दा के प्रसिध्द भक्तगण थे । सन्त ब्रिजिट को एक दर्शन मिल था जिसमे येसु ने उसे सन्त युध्दा मे विश्वास रखते हुए मदद मॅगने को कहा। येसु ने उन्हे बताया कि सन्त युध्दा का अपनाम तद्दै (जिसका मतलब उदार, साहसी और दयालु है) के अनुसार वह स्वयं को एक सहायक के रूप मे दिखाया।

मानव समाज आधुनिक तकनीको प्रगति के बावजूद भी (मानव जाती) अपने को अविश्वासनीय कठिनाईयों का सामना करते हुऐ पाती है। हमारी सारी आधुनिक तकनीके और मानव अविष्कार हमें सुविधा प्रादान करने मे असमर्थ हो जाती है, और संसार के लोग अपने मे

अकेलापन और आसहाय महसूस करते है । तब सन्त युध्दा के पास सहायता केलिए आते है । जिन्होने भी सन्त युध्दा से सच्चे दिल से सहायता मांगी, उन्होनें हमेशा युध्दा से एक सच्चा मित्र और एक आशा की किरण देखी है । वह हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहता है । चाहे हमारी आवश्यकता कितनी ही बडी क्योंना हो, आज के इस कोलाहाली युग मे हमे उनकी अति आवश्यकता है।

कैथोलिक कलीसिया विश्वास करते है कि कलीसिया जो पृथ्वी पर निवास करती है उसकी संबंध स्वर्ग के कलीसिया के साथ है । ख्रीस्त मे हम सभी एक दुसरे के भाई-बहन है। हम हमेशा सन्तों से हमारे लिए प्रर्थना करने की आग्रह करते है ।

कालीसीया यह भी सिखाते है की पवित्र त्रित्व सभी जीवन और कृपाओं का स्त्रोत है । हम सन्त से अर्जी करते है कि वह हम सभी से मिलकर स्वर्ग शक्तीमान पिता परमेश्वर से प्रर्थना कारे। संसार मे बहूत लोग दुसरो के अनुभव तथा सत्य कथन सुनकर विश्वसा करते है, कि सन्त युध्दा हमारे और ईश्वर के बीच मे एक बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है। ईश्रर हम लोगों की प्रर्थनओं को सुनता है और उनका उतर देता है । ईश्वर हमारे सभी अच्छे सदगुणो को प्रदान करते है।

जो कोई सन्त युध्दा से सहयाता की आग्रह करते है उनके वह सभी प्रकार के महामारी बिमारीयों, गरीबी, उदासी, बयंकर मानसिक दबाव, पारिवारिक संबंधी कठिनाई यों से उस सुरक्षित पथ से परिचित करायेगें जो उन्हे सब प्रकार की कठिनईयों से दूरले जाती है । अपने भक्तों के लिए सन्त युध्दा साशाक्त मित्र और एक आशा की किरण हमेशा ही साबिता हुए है।